फले फूलेगा प्रदूषण का बाज़ार

 पांच साल के भीतर प्रदूषण के भय को भुनाने के लिये प्रदूषण का वैश्विक व्यवसाय बुरी तरह पसरेगा। अपना देश उसके लिये सबसे बड़ा बाज़ार बनेगा।

टीवी और एफएम रेडियो पर एयर प्योरीफायर के विज्ञापन बढ गये हैं। वह विज्ञापन भी अब बहुत दिखने लगा है जिसमें किसी दिन भर बाहर रह कर काम करने वाले मर्द के चेहरे पर जमी सारी धूल कालिख एक क्रीम निकाल कर फेंक देती है। ऑन लाइन दुकानों पर मॉस्क की बिक्री बढ गयी है। यह महज शुरुआत है। अगले पांच साल के भीतर बाज़ार प्रदूषण रोधी उपकरणों और प्रसाधन सामग्रियों से पटा पड़ा होगा। सर्दियां आते ही वायु प्रदूषण के लेकर ध्वनि प्रदूषण बढ गया है।  तापमान गिरेगा, हवा ठंड़ी होगी। हवा में घुला प्रदूषण और गाढ़ा होगा। हमारी हवा में कितना ज़हर घुला है यह हर हफ्ते जारी होने वाले सरकारी आंकड़े जब बताएंगे। आपकी हवा खराब हो जायेगी। इस आसन्न खतरे का प्रचार टीवी और रेडियो कुछ ज्यादा ही बढा कर रहा होगा क्योंकि इस के भय से निर्मित होगा एक नया बाज़ार। जल्द ही देश के बाजारों  में वे सारे उपाय उपलब्ध होंगे जिनका दावा होगा कि वे प्रदूषण की महामारी से आपको बचा सकते हैं या उनका बुरा साया आप पर से टाल सकते हैं या फिर उसका पड़ने वाला असर कम कर सकते हैं। यह भी कि उन्होंने ही बीजिंग या ऐसे ही दूसरे बुरी तरह प्रदूषित शहरों में वे खूब बिकते हैं।  प्रदूषण के नाम पर पैसा बनाने के लिये तमाम उत्पाद, और सेवायें  बाज़ार में कूद पड़ेंगी। बस दो तीन साल के भीतर।

समूचे संसार में शहरीकरण बढ रहा है। शहरवासियों की तरह की जीवन शैली का प्रसार हो रहा है। गाड़ियां और प्रदूषण भी बढ रहा है। लोग सौंदर्य प्रसाधन का धुंआधार इस्तेमाल कर रहे हैं। अब यह महज महिलाओं का क्षेत्र ही नहीं  गया है न ही महज सौंदर्य बढाने का जरिया। अब कंपनियां इसे प्रदूषण के दुष्प्रभाव से आपकी खाल और दूसरे हिस्से बचाने का दावा करती बेच रही हैं। एशिया प्र्शांत क्षेत्र में  प्रदूषण से बचाव करने का दावा करने वाले इस तरह के सौंदर्य उत्पादों की बिक्री में 2011 से 2012 के दौरान 40 फीसद का इजाफा देखने को मिला और यह बढकर 2013-2014 में 61 फीसद हो गया। फिलहाल इसमें बढत का अनुमान है। अनुमान ही लगाया जा सकता है जब इसमें भारतीय खरीदारों की भारी संख्या जुड़ जायेगी तो आंकड़ा क्या होगा। भविष्य में वह दिन अब दूर नहीं जब इन उत्पादों को लोग तेल , साबुन, मच्छर भगाने की क्रीम वगैरह की तरह रोजाना के खरीदे में शामिल कर लेंगे। जैसे जैसे प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढेगी,प्रदूषण से संबंधी बाजार और परवान चढेगा। अगले पांच साल के भीतर यह उफान पर होगा।

प्रसाधन सामग्री का बाजार जब प्रदूषण और शहरी जीवन के दुष्प्रभाव  से जुड़ जायेगा तब वह क्षेत्र, वर्ग, अवसर, आयु और लिंग भेद की सीमायें तोड़ कर बेतहाशा बढेगा। पांच साल भीतर  प्रदूषण महज दिल्ली या दर्जन भर शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, तकरीबन समूचा देश प्रदूषण की चपेट में होगा और इसके प्रति जागरूकता भी पूरे देश में  होगी।  य्ह केवल अमीरों का चोंचला नहीं कहा जा सकेगा हर वर्ग इसके चपेट में होगा। इन प्रसाधनों का इस्तेमाल किसी खास अवसर विशेष पर करने के बजाये नियमित होगा सो इनकी खपत बढेगी। चमड़ी, चेहरा, बाल, और आंखों की देखभाल वाले उत्पाद तथा नहाने धोने के साबुन इस खास वर्ग में जबरदस्त बाजार बना रहे हैं। अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा के नाम पर या हो या धूल गर्द से बचाव की बात इस तरह के उत्पाद सौंदर्य प्रसाधन के बाजार में लगातार अपनी पहुंच और पकड़ बना रहे हैं। अपने उत्पाद बेचने के लिये प्रसाधन के व्यवसाय में कूदे कंपनियां बड़े स्तर पर प्रदूषण के प्रति जागरूकता का प्रचार खुद करेंगी।

ज्यादातर उत्पादों में प्रदूषण से निजात दिलाने उसके दुष्प्रयोग प्रयोगों का असर कम करने की बात महज प्रचार है। इसमें ऐसे कोई तत्व नहीं जो खास इसके लिये बने हों। गोरा करने, चेहरा साफ करने, विटामिन ए या डी की विशेष मात्रा  और गंदगी खींच निकालने की बात बस प्रचार मात्र है यह सब काम तो करते हैं पर खासतौर पर प्रदूषण के लिये ही बने हों ऐसा नहीं है पर भय के बाजार को भुनाएंगे। कुछ नये तकनीकि वाले उत्पाद तो अगले बरस तक ही देश में पहुंच जायेंगे जैसे  न दिखने वाला मास्क। इंफीप्योर के नाम से बिकने वाला यह मास्क बेहद छोटा है। इसे बस नथुनों में फिट कीजिये और बेहद प्रदूषित हवा को भी छान कर ग्रहण कीजिये। प्रयोग के बाद आप इसे बाहर निकाल कर साफ भी कर सकते हैं। वायु प्रदूषण नापने की साधारण मशीन भी  जो तत्काल बता देगी कि जिस हवा में  आप सांस ले रहे हैं उसकी गुणवत्ता कैसी है और खतरे का स्तर कैसा है। बीजिंग में एक स्मार्ट्फोन एप बहुत काम आता था जो 72 घंटे पहले बता देता है कि आपके क्षेत्र में प्रदूषण स्तर कैसा रहने वाला है। कानपुर आईआईटी भी प्रदूषण स्तर की भविष्यवाणी करने वाला ऐसा ही एक एप इसी साल लांच हो जायेगा जो पहले तो दस चुनिंदा शहरों में यह एलर्ट देगा बाद में देश के तमाम दूसरे शहरों में भी।

पिछली साल एक बहुत बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी फिलिप्स ने भारत में अपना प्योरीफायर बेचना शुरू किया। आज बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इसका 200 करोड़ का बाजार भारत में है और यूरेका फोर्ब्स सहित पाँच बडी और दर्जन भर छोटी कंपनियां इस व्यवसाय में कूद पड़ी हैं। कार, कमरे, पूरी बिल्डिंग में लगाये जा सकने वाले हर तरह के एयर प्योरीफायर मौजूद हैं, ये तीन हजार से लेकर लाखों तक की कीमत के है। ब्रीदिग साइकिल भी शहर के सड़कों पर उतर सकती हैं इनके कैरियर पर एक छोटा सा जेनेरेटर लगा होता है और हैंडिल के बीचोबीच एयर फिल्टर। जब आप पैडल मारते हैं, पहिये घूमते हैं तो बिजली बनती है जो जेनेरेटर को चलाती है और जेनेरेटर एयर फिल्टर को जो आपके चेहरे पर लगातार ताज़ा हवा के झोंके फेंकता चलता है।

हालैंड के एक वैज्ञानिक दान रूसेगारदे के स्मग प्रोजेक्ट को चीन सरकार इस साल के आखीर तक शुरू कर देगी। पाइपों और इलेक्ट्रो मैग्नेटिक प्रभाव के जरिये आसमान में फैले कोहरे और प्रदूषित हवा यानी स्मग में से न सिर्फ हानिकारक गैसें बल्कि विषैले तत्व ऐसे ही खींच लिये जायेंगे जैसे वैक्यूम क्लीनर आपकी कालीन से धूल इकट्ठा करता है। हवा साफ हो जायेगी और इकट्ठा प्रदूषणकारी तत्व से एसी चीज बनेगी जिससे जेवर बनाये जा सकते हैं। है।एक दूसरी परियोजना एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक की है रिहाइशी सोसाइटी अथवा बड़ी छोटी कालोनियां एक बड़े से बुलबुले सरीखी आकृति के आवरण में रखने की।  जिनके भीतर साफ हवा हर समय मौजूद होगी। बाहर के गंदी हवा आयेगी नहीं और भीतर की हवा को इसमें लगे प्योरीफायर, बागीचे और दूसरी तकनीक साफ करती रहेगी। इस एक बेहद पतले और मजबूत पारदर्शी आवरण के नीचे पूरी सोसाइटी सुख की सांस लेगी। यह अकल्पनीय और अव्यावहारिक सी कल्पना लग सकती है पर इस पेशकश चीनी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इस तरह की कई अनूठी परियोजनायें दशक भीतर मूर्त रूप ले सकती हैं।

बाजार में कुछ ऐसी दवायें मौजूद हैं जिनका दावा है कि वे प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कम करती और  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाती हैं, अग्रेजी दवायों के साथ साथ जड़ी बूटियां इसमें शामिल हैं, यह बाज़ार अभी शैशवावस्था में है पर ज़ोर पकड़ेगा। आने वाले सालों में सेवा क्षेत्र में साफ हवा विशेषज्ञों का काम खूब चल निकलेगा। ये विशेषज्ञ आपके घर और आसपास की एयर क्वालिटी को नापेंगे। आप को ऐसे में क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिये कौन से उपाय करने चाहिये,अपने काम धाम और घरेलू जीवन में क्या सावधानियां बरतें,ये सब बतायेंगे। वे यह भी सलाह दे सकते हैं कि आपको एयर प्योरीफायर लगवाने की जरूरत है या एयर फिल्टर की और यह भी कि वह किस तरह और कितनी क्षमता और कैसी तकनीकि वाला होना चाहिये।  आप के शहर में न हों तो इंटरनेट के जरिये संपर्क करें वो आपके दरवाजे पर पहुंच जायेंगेज़ाहिर है इसका बाज़ार खूब बढ़ेगा। बच्चों पर प्रदूषण का असर ज्यादा जल्दी से और तेज होगा सो इनके बाहर खेलने का समय और कम होगा जाहिर है इनडोर, और मेबाइल, गेमिंग के बाजार को बढत  मिलेगी।

(संजय श्रीवास्तव लेखक भारतीय फ्यूचरिस्ट हैं।)

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