किससे ज़्यादा परेशान हैं: महंगाई से या महंगाई के सपोर्टर से,रवीश कुमार

किससे ज़्यादा परेशान हैं: महंगाई से या महंगाई के सपोर्टर से

भारत में एक राजनीतिक परिवर्तन हुआ है। इस परिवर्तन ने उस मिथक को ध्वस्त किया है कि महंगाई चरम पर जाने से जनता विरोधी हो जाती है। आज महंगाई से परेशान सब हैं। यह कोई मच्छर काट कर भाग जाने वाली जैसी परेशानी नहीं है बल्कि चमोकन की तरह चमड़े को धर लेने वाली परेशानी है। उसके बाद भी लाखों लोग महंगाई के समर्थन में हैं। इनके पास महंगाई को सही ठहराने के लिए तमाम तर्क हैं। ये लोग शर्म-प्रूफ हैं। पूरी तैयारी के साथ बहस करते हैं कि महंगाई है तो देश भी तो है। जैसे देश हवा मिठाई की तरह ग़ायब हो जाने वाला था। एक जनाब तर्क दे रहे हैं कि पाकिस्तान में 35 रुपया लीटर पेट्रोल है, सस्ता है वहाँ लेकिन उस देश की हालत देख लो। इस तरह से लोगों की जो ब्रेन-वॉशिंग (दिमाग़ में धुलाई पर्यन्त भूसा भरने की प्रक्रिया) पूरी हो चुकी है।महंगाई के इन शानदार सपोर्टरों के डर से या उलझने से बचने के कारण कई लोग महंगाई की बात खुल कर नहीं करते हैं।

नरेंद्र मोदी की तमाम राजनीतिक उपलब्धियों में से यह काफ़ी बड़ी है। एक नेता महंगाई बढ़ा दे और महंगाई के सपोर्टर पैदा कर दे, आसान नहीं है। महंगाई बढ़ने पर समर्थक भाग जाया करते थे लेकिन मोदी के समर्थक बख़ूबी मैदान में डटे हैं बल्कि लोग इन्हीं के डर से बस, ट्रेन और प्लेन में महंगाई की चर्चा करने से बच रहे हैं।महँगाई के इन सपोर्टरों ने बीजेपी और मोदी के लिए तमाम बहसों की संभावनाओं को ख़त्म कर दिया है। लोग ही लोग से डरे हुए हैं। 118 रुपए पेट्रोल भरा कर मस्त हैं। इस रिपोर्ट में एक महिला अपील की मुद्रा में हैं कि कुछ कीजिए ताकि मन चेंज न हो।निवेदन और अपील के भाव में बात रखी जा रही है। मन चेंज होने से मोदी से बचा लें। दस महीनों की महंगाई में न जाने कितने घर बर्बाद हो गए लेकिन इन महिला का अभी मन चेंज नहीं हुआ है और वे उम्मीद में हैं कि मन के चेंज होने से मोदी जी बचा लेंगे। लगता है अभी दाम बढ़ने के और भी गुंजाइश है।

महंगाई के इस पूरे संकट में नौटंकी बाक़ी है। जिस तरह कोरोनावायरस की दूसरी लहर के बाद धन्यवाद मोदी जी के पोस्टरों का जाल बिछाया गया, मुफ़्त टीका का झूठ रचा गया, जिन्होंने पैसे दिए, उनकी गिनती भी मुफ़्त टीके में कर ली गई, लाखों लोगों की मौत को लोग भूल गए, आक्सीजन संकट को नकार दिया गया, उसी तरह महंगाई को भी नकारने के लिए जल्दी ही मोदी को महंगाई का मसीहा के तौर पर लाँच किया जाएगा। जिस जनता की जेब से दस महीने तक पैसे निकाले गए, ख़ून चूसने की तर्ज़ पर, उसको यक़ीन दिला जाएगा कि मोदी ने महंगाई से लड़ाई जीत ली है।दाम घट गए हैं। जब लोग कोरोनावायरस की लहर में लाखों लोगों की मौत को भूल सकते हैं, वही लोग महंगाई के इस दौर को भी भूल जाएँगे और पोस्टर लगाया करेंगे, धन्यवाद मोदी जी।

रवीश कुमार की फ़ेसबुक वाल से

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